मंगलवार, 26 मई 2009

टी-२० के मूड में राजनाथ

पीएम इन वेटिंग लालकृष्ण आडवाणी को लोकसभा चुनाव में ठिकाने लगाने में कामयाब रहे भाजपा के राजपूत शिरोमणि राजनाथ सिंह अब गिलक्रिस्ट की तरह ताबड़तोड़ बैटिंग के मूड में हैं। आडवाणी को आजीवन प्रतीक्षालय में भेजने के बाद राजनाथ अब निष्कंटक हैं। क्योंकि वह जब अध्यक्ष बनाए गए तो उसी दिन आडवाणी की खड़ाऊं पकड़ा कर उनको बता दिया गया कि भारत के महामहिम राष्ट्रपति की भांति उन्हें भी आडवाणी और नागपुर के आदेश बिना पढ़े जनता तक ढ़ोने हैं। तब उनके सिर्फ दस्तखत थे लेकिन राज उनका नहीं था और नाथ भी कोई और था। अब राज भी उनका है और नाथ भी वही। इसलिए चुनाव हारने के बाद उन्होंने सबसे पहले उत्तराखंड में चैन की बांसुरी बजा रहे जनरल खंडूड़ी को निपटाने का प्रोजेक्ट हाथ में लिया। वो तो अध्यक्ष जी एक ही वार में जनरल का काम तमाम कर चुके होते लेकिन एक बार फिर आडवाणी ने बचा लिया। पर राजनाथ गुर्रा रहे हैं कि बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी?आज नहीं तो कल सही। परंतु अपने जनरल खंडूड़ी भी कोई कम ऊंचे दर्जे के थोड़े ही हैं। लोकसभा चुनाव में 5-0 से सफाये के बाद खुद हाई मारेल ग्राउंड पर रखने के लिए इस्तीफे की पेशकश कर आए यानी "आ बैल मुझे मार"। अध्यक्ष जी तो बाघ की तरह शिकार के घर से बाहर निकलने की इंतजार में बैठे थे। अब जब बैल पीछे पड़ गया है तब जनरब,"रक्षा करो, रक्षा करो" की गुहार लगा रहे हैं। अब आप ही बतायें जो खुद मुसीबत बुलाने पर आमादा हो उसे आडवाणी भी कब तक बचा लेंगे।

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